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अल्लाह के नाम के अदब की कैसी बरकत(Hindi)

अल्लाह के नाम के अदब की कैसी बरकत
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Adab ki barkat islamic story

एक थे हवलदार ।
वह हरवक्त शराब में मस्त  रहते । गुनाहों में मशगूल रहते । उनकी जिंदगी अच्छी नहीं है। दीन के कोई अमल का उनकी जिंदगी में नामो निशान नहीं था ।

 एक मरतबा की बात है । वह शराब के नशे में कहीं जा रहे थे । रास्ते में उनकी नज़र एक कागज़ के टुकडे पर पडी । देखा तो उस टुकडे में अल्लाह का नाम लिखा हुआ था । यह देखकर उन्होंने सोचा . . . | ' अल्लाह का नाम !
और इस तरह रास्ते में ! अरे ये तो अल्लाह के नाम की बेअदबी है । यह सोच कर उस शराबी ने जल्दी से कागज़ का टुकडा उठा लिया । उसे अच्छी तरह साफ किया । फिर उसे चूम कर अपने सर पर रखा । उस के बाद इत्र लगा कर किसी ऊंची जगह में अदब से रख दिया ।

उस जमाने में हज़रत हसन बसरी रहमतुल्लाहि अलयहि नाम के एक बहुत बड़े बुजुर्ग थे । उनको रात को एक ख्वाब आया । ख्वाब में कोई उन्हें कह रहा  था . . . " जाओ , उस आदमी को जा कर कह दो के तुम ने अल्लाह के नाम की कद्र की , इज्जत की , अदब किया , उसे पाँव से उठा कर सर पर रख्खा । इसलिये उस की बरकत से अल्लाह तुम को भी बुलंद मरतबा अता फरमाोंगे ।

 फर्श से अर्श पर पहूंचाऐंगे ।   _ _ _ इतने में हसन बसरी की आंख खुल गई और  वह सोचने लगे . . . ' अरे ! जिस के बारे में मुजे ख्वाब  में खुशखबरी देने का हुकम हुआ है वह शराबी आदमी है।

आवारा इन्सान है । शायद मेरा ख्वाब सही  नहीं है । या मुज़ से कोई गलती हुई है ।

' यह सोच कर हज़रत हसन बसरी उस शराबी आदमी के पास नहीं गए । दूसरी रात फिर वैसा ही ख्वाब आया । इस रात भी हजरत हसन बसरी ने टाल मटोल से काम लिया और ख्वाब की तरफ ध्यान नहीं दिया ।

 तीसरी रात फिर से ख्वाब आया । अब हज़रत हसन बसरी रहमतुल्लाहि अलयहि को यकीन हो गया के ख्वाब सच्चा है । वह जल्दी से उस शराबी के घर पहूंचे और अपना पूरा ख्वाब सुनाया । साथ ही उसे बुलंद मरतबा मिलने की खुशखबरी भी दी ।

जब उस शराबी ने यह बशारत सुनी तो वह एकदम खुश हो गया । उसने फौरन अपने सारे गुनाहों से तौबा की । और नेक  कामों में मशगूल हो गए उनको रात फिर एक वक्त जैसा आया कि उनकी नेकी और उनकी परहेजगारी का डंका पूरी दुन्या में बजने लगा ।

 दुन्या के बड़े अवलिया अल्लाह में उनका शुमार होने लगा । जानते हो सिर्फ अल्लाह के नाम की अदब की लिये इतने बड़े बलीअल्लाह बनने वाले बह शराबी तबा हवालदार कौन थे ?

  बह थे हजरत बिस्र हाफी रहमतुल्लाहि अलयहि । और अल्लाह के नाम के अदब की कैसी बरकत । मिल गई बुलंद दरजे की विलायत ।
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