Sunehri baate islamic words of love
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अल्लाह दे कर भी आजमाता हे और लेकर भी
गुनाह में लज्जत जरूर है मगर सुकून नहीं!
बात अल्फ़ाज़ की नहीं,केहने के अंदाज की होती है!
किसी के बारे में बुरा मत सोचो,हो सकता है कि वो अल्लाह की नजर में तुम से बेहतर हो।
इंसान नेक बात तो सुन लेता है मगर आगे पूछना जरुरी नहीं समजता।

           ⏩⏩⏩भूल जाता हूं!⏪⏪⏪
➥तंदुरस्त हु तो .....अल्लाह को भूल जाता हूं!
➥मशगूल हु तो............नमाज़ भूल जाता हूं!
➥बुराई करू तो...........अंजाम भूल जाता हूं!
➥खाता हु तो...............बिस्मिल्लाह भूल जाता हूं!
➥खा लू तो.................अल्हम्दुलिल्लाह भूल जाता हूं!
➥किसी से मिलु तो..........सलाम भूल जाता हूं!
➥सोता हु तो..............तौबा भूल जाता हूं!
➥गुस्से में होता हूं तो...............सब्र भूल जाता हूं!

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